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तेलंगाना सरकार का अजीबोगरीब फरमान, अब अविवाहित महिला कैंडिडेट ही कॉलेजों में ले सकेंगी एडमिशन

 Sudarshan News Beuro |  2017-03-02 08:32:58.0

तेलंगाना सरकार का अजीबोगरीब फरमान, अब अविवाहित महिला कैंडिडेट ही कॉलेजों में ले सकेंगी एडमिशन

हैदराबाद : महिलाओं को लेकर तेलंगाना सरकार अजीबोगरीब नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें महिलाओं को लेकर सरकार ने कॉलेज को ही दो कैटेगरी में बांट दिया गया है और इतना ही नहीं शादीशुदा महिलाओं पर ही सवाल खड़े किए गए है कि वह अनमैरिड लड़कियों को भटकाती हैं। तेलंगाना सरकार का कहना है कि सिर्फ अविवाहित महिला कैंडिडेट ही कॉलेजों में एडमिशन ले सकती हैं। सरकार की दलील है कि शादीशुदा युवतियों के कॉलेजों में होने से कुंवारी लड़कियों का ध्यान भटक सकता है।

शादीशुदा युवतियों के एडमिशन पर पाबंदी वाले इस फरमान पर तेलंगाना सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स सोसायटी के एक अधिकारी बी वेंकट राजू का कहना है कि इस नियम के पीछे का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अन्य लड़कियों का ध्यान पढ़ाई से न भटके क्योंकि शादीशुदा युवतियों के पतियों की सप्ताह में एक बार या 15 दिन में एक बार उनसे मिलने कॉलेज आने की पूरी संभावना है। स्टूडेंट्स में किसी भी तरह का भटकाव वे नहीं चाहते हैं।


एक नोटिफिकेशन के जरिए सरकार ने सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल वुमेन डिग्री कॉलेजों के अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए ये बात कही है। इन कोर्स में बीए, बी कॉम, बीएससी शामिल है। 23 आवासीय कॉलेजों के करीब 4 हजार सीटों पर एडमिशन इस नियम से होता है। इन कॉलेजों में महिला कैंडिडेट को सभी चीजें मुफ्त दी जाती हैं। यह नियम एक साल के लिए लागू किया गया है और 4000 महिलाएं इन हॉस्टल में रहकर पढ़ रही हैं।

राज्य में ऐसे 23 रेजिडेंशल महिला डिग्री कॉलेज हैं जहां हर कॉलेज में 280 छात्राएं पढ़ और रह सकती हैं। इन कॉलेजों में रहने, खाने और पढ़ने की सुविधा पूरी तरह मुफ्त है। इस कॉलेजों में 75 पर्सेंट सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं जब कि बाकी 25 पर्सेंट सीटें अनुसूचित जनजाति, पिछड़ी जातियों और जनरल कैटिगरी के लिए हैं।



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