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अपने गिरेबान में झांको पाकिस्तान, भारत था, है और रहेगा महान

 Sudarshan News Beuro |  2017-02-25 06:44:56.0

अपने गिरेबान में झांको पाकिस्तान, भारत था, है और रहेगा महान

नई दिल्ली : अपने देश में महिलाओं की जिंदगी नर्क से भी बदतर जिंदगी को छुपाने वाली पाकिस्तानी मीडिया भारत की मीडिया को महिलाओं के विषय में सलाह दे रही है। उस नासमझ, नादान पाकिस्तानी मीडिया को सुदर्शन न्यूज का जवाब।

पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र हेराल्ड.डॉन ने अपने मुखपृष्ठ पर भारत के लगभग सभी प्रमुख सम्मानित समाचार पत्रों की तस्वीरें जिनमे दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, द हिन्दू, डेल्ही टाइम्स, नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, दैनिक भाष्कर व् मिंट जैसे सम्मानित भारतीय अखबार प्रमुख हैं की तस्वीरें छाप कर उन्हें बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कुछ झूठे शब्दों के हेर फेर कर के सही रिपोर्टिंग करने की सलाह दे रहा है।

शायद पाकिस्तानी मीडिया अपने कालिख से भी काले अतीत को पूरी तरह भूल रही है जिसे सुदर्शन न्यूज एक बार फिर आम जनमानस के आगे याद दिलाना चाह रहा है। कृपया ध्यान से पढ़ें...

1- भारत की संयमित और संतुलित मीडिया पर ऊँगली उठाने वाली पाकिस्तान की वही मीडिया है जिसके देश में बलात्कार, दमन व् अत्याचार से पीड़ित बलोच महिलायें अपना दर्द फूट-फूट कर रोते हुए भारत की मीडिया को सिर्फ इसलिए बताती हैं क्योंकि उन्हें पाकिस्तान की फ़ौज, पाकिस्तान की हुकूमत की तरह पाकिस्तान की मीडिया पर भी जरा सा भी विश्वास नहीं है।

2- महिलाओं के प्रति झूठी नरमी दिखाने वाली पाकिस्तानी मीडिया ने सन् 1971 से पहले पूर्वी पाकिस्तान कहे जाने वाले वर्तमान बंगलादेश में पश्चिमी पाकिस्तान से जाकर सामूहिक बलात्कार करने वाली पाकिस्तानी फ़ौज के कारनामे कब और कितनी बार छापे?

3- भारतीय मीडिया को महिलाओं पर सही शब्दों के चयन की बिना मांगी सलाह दे रही। पाकिस्तानी मीडिया के दोगलेपन के हजारों उदाहरण यू ट्यूब पर पड़े हैं जिनमे लाइव शो में महिला मीडियाकर्मी या गेस्ट के तौर पर शामिल महिला की सार्वजनिक बेइज्जती अपशब्दों और कभी-कभी भद्दी-भद्दी गालियों से हुई हैं।

4- पाकिस्तान की प्रसिद्द महिला पत्रकार सबीन महमूद की बेरहमी से हत्या कर देना और उसके बाद पाकिस्तानी मीडिया का खामोश हो जाना खुद में ही दोगलेपन का बहुत बड़ा प्रमाण है।

5- महिला सम्मान की दुहाई देने वाली पाकिस्तानी प्रिंट मीडिया में महिला पत्रकारों की भागीदारी सिर्फ 8% है।

6- जहां भारत ने सार्वजनिक भागीदारी के हर क्षेत्रों में महिलाओं को आरक्षण देने की अभूतपूर्व पहल की है वहीँ पाकिस्तान की लगभग 9 लाख की कुल सेना में महिलाओं की संख्या मात्र 5 हज़ार के आस पास ही है।

7- स्वात घाटी में पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा पख्तून महिलाओं पर हुए बर्बर अत्याचार पर जब दुनिया की सारी मीडिया एक स्वर में बोल रही थी तब लच्छेदार बातें करती यही पाकिस्तानी मीडिया पूरी तरह मूक स्वर में पाकिस्तानी फ़ौज की हाँ में हाँ मिला रही थी।

8- पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जब महिला सुरक्षा बिल का वहां के कट्टर इस्लामिक संगठन विरोध कर रहे थे तब इसी पाकिस्तानी मीडिया की हिम्मत भी नहीं हुयी कट्टरता के उन सौदागरों के विरोध में खड़े होने की।

ऐसे अनगिनत तथ्य और प्रमाण हैं जिनको अगर सामने लाया जाय तो शायद नकली चेहरा लगा कर झूठा ज्ञान बाँट रही पाकिस्तानी मीडिया को मुँह छिपाने की भी जगह ना मिले। इसलिए सुदर्शन न्यूज की पाकिस्तानी मीडिया को नेक सलाह है कि वो बेहद शांत और अत्यधिक संतुलित भारतीय मीडिया को अपनी सलाह देने के बजाय अपने देश में बद से भी बदतर हो चुकी महिलाओं की स्थिति पर ध्यान दे क्योंकि अभी भी पाकिस्तान की पख्तून और बलूच महिलाओं की अधिकतर समस्याएं भारतीय मीडिया ही उठा कर उन्हें न्याय दिलाती हैं।

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