मुख्य समाचार
  • Breaking News Will Appear Here

भारत ने पांचवीं जेनरेशन के एयरक्राफ्ट्स पर काम शुरू करने से पहले रूस के साथ रखी ये शर्त

 Sudarshan News Beuro |  2017-03-09 07:02:48.0

भारत ने पांचवीं जेनरेशन के एयरक्राफ्ट्स पर काम शुरू करने से पहले रूस के साथ रखी ये शर्त

नई दिल्ली : रूस के साथ पांचवीं जेनरेशन के सुखोई लड़ाकू विमान बनाने को लेकर अरबों डॉलर की परियोजना पर काम शुरू करने से पहले भारत ने शर्त रख दी है। भारत सरकार ने फैसला लिया है कि इस बार रूस के साथ डील इस बात पर निर्भर करेगी कि वो भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जरूरी सभी टेक्नोलॉजी लड़ाकू विमान के साथ देगी।

चौथे जेनरेशन के सुखोई विमान को भारत ने रूस सरकार से 55,717 करोड़ रुपये खर्च कर खरीदे थे। लेकिन रूस ने भारत को इस लड़ाकू विमान की मैन्यूफैक्चरिंग के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी नहीं दी थी। अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत को रूस से नवीनतम पांचवे जनरेशन का लड़ाकू विमान खरीदना है।


रूस से खरीदे गए 272 सुखोई विमान में 240 विमान की एसेंब्ली का काम सरकारी डिफेंस मैन्यूफैक्चरर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स ने किया। लेकिन पूरी टेक्नोलॉजी न मिलने के कारण एचएएल पूरी तरह से विदेशी पुर्जो निर्भर रहे। इसका अंदाजा इसी बात से लगता है कि एचएएल से एसेंबल किए गए सुखोई विमान पर लागत 450 करोड़ रुपये आती है और रूस में बने सुखोई को भारत 350 करोड़ में खरीद सकता है।

तकनीक की मांग करते हुए भारत ने कहा है कि रूस इस लड़ाकू विमान के संयुक्त विकास और इसके उत्पादन के काम की शुरुआत तभी करेगा, जब रूस उसे तकनकी पूरी तरह हस्तांतरित करने पर अपनी सहमति जता देगा। भारत का कहना है कि सुखोई विमान की तरह फिर से कोई गलती नहीं करेगा। सुखोई विमान सौदे में रूस के साथ तकनीक पूरी तरह हस्तांतरित नहीं था। इस मामले में रक्षा मंत्रालय का मानना है कि लड़ाकू विमान की तकनीक हस्तातंरित होने के बाद हमें स्वदेशी विमान तैयार करने में मदद मिलेगी।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top